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Thursday, 22 June 2017

याद है अब भी बाक़ी आपके शहर की

कैसी ठंढी हवा आपके शहर की
है ये रास्ता ज्वा आपके शहर की

मिट्टियों की खसबू मौसमो का मिजाज़
खास है सारी बातें आपके शहर की

रक़ीब हैं जो यहाँ वो भी मेरे दोस्त हैं
ज़िन्दगी है अजीब आपके शहर की

जाता हूँ नहीं अब मैं कई साल से
याद है अब भी बाक़ी आपके शहर की

ज़िंदगी में हर इंसान से दो बार मुलाकात होती है।

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