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Wednesday, 20 July 2016

आधुनिक हामिद

ऐसा नहीं की अब कोई हामिद नहीं जिसकी ईद प्रेम चंद जी ने दुनिया को बताई थी। असल तो ये है की अब कोई वैसा स्वानेह निगार न रहा। अब तो केवल चेतन भगत टाइप ही बचे हैं। या यूँ कहलें ली अब शायद वो हामिद बड़ा होगया होगा और चेतन की नावेल में जो अश्लील हरकत करता हुवा नौजवान पाया जाता है वो हामिद का बिगड़ा हुवा रूप हो। या हामिद कहीं दूर चला गया। या फिर आज हमारे सोसाइटी में कई हामिद हो गयें इसलिए सबके ईद का वर्णन करने से अच्छा है हाफ गर्लफ्रेंड टाइप स्टोरी को कवरेज दे दिया जाये। बाजार  की मांग पे लिखा जाने वाला अदब भी बाजारू ही हो जाता है।

ज़िंदगी में हर इंसान से दो बार मुलाकात होती है।

दिल्ली 2009: दिल्ली मेट्रो प्रोजेक्ट के दौरान, जब मैं DYWIDAG कंपनी में कार्यरत था, तब मेरी दोस्ती जर्मनी से आए एक सहकर्मी से हुई। काम के द...