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Friday, 26 February 2016

आदाब ऐ ज़िन्दगी में भी अदा होते हैं कई सुन्नत
फिरभी लोग मजारों पे जाके दिखे मांगते मननत

दुवाओं में बात सिर्फ इतनी सी है  मेरे आक़ा
के मैंने रजा मांगी तेरी  और उसने जन्नत

                                                         शर्फू

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