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Monday, 15 June 2015

अब पता चला के ज़िन्दगी क्या है

गर खो गया मैं तो गम क्या है
न हु मैं यहाँ तो कम क्या है

जो मुझे ज़िन्दगी में कोसते थे
मौत पर कहते है के अब क्या है

मरके ज़िंदा हूँ, या जी कर मुर्दा था
मरगया जो मैं, तो अब अफ़सोस क्या है

देखे बड़े तरपने वाले मौत के जनाजे पे
ज़िन्दगी में न पूछा जिसका के हाल क्या है

मरके बड़ा खुश हूँ में इस दर पे सरफ़राज़
अब पता चला के ज़िन्दगी क्या है

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