My Blog List

Monday, 19 January 2015

उनका इन्तेजार है

हाथो में लिए फिरता हूँ चराग के किसी की तलाश है मुझे
ये अधूरी जिंदगी और किसी की आस है मुझे

मिलजाए अगर तुझको तो कहना उनसे मेरे दोस्त
आज भी उनका झगड़ना याद है मुझे

जिस राह पे कभी वो चला ही न था
क्यों  उस राह पे उनका इन्तेजार है मुझे

No comments:

Post a Comment

ज़िंदगी में हर इंसान से दो बार मुलाकात होती है।

दिल्ली 2009: दिल्ली मेट्रो प्रोजेक्ट के दौरान, जब मैं DYWIDAG कंपनी में कार्यरत था, तब मेरी दोस्ती जर्मनी से आए एक सहकर्मी से हुई। काम के द...