My Blog List

Friday, 11 December 2015

पता चला अदालतें भी उधार लेती हैं

ज़िन्दगियों को मौतें बिगार देती हैं
वफ़ा को शोहरत उजार  देती हैं

पट्टियां आँखों पे बांधे ये अदालत की मूर्तियां
जैसे जुल्म मुंसिफ की आँखें निकाल लेती है

हमतो ढूंढते रहे अदालत  में इन्साफ
पता चला अदालतें  भी उधार लेती हैं

आँखों पे पट्टियाँ बाँध  के इन्साफ
कानों में कुछ कपड़े भी दाल लेती है

कोई बरसो सड़ता रहा इंसाफ के लिए
किसी को इन्साफ खुद ही पुकार लेती है









No comments:

Post a Comment

ज़िंदगी में हर इंसान से दो बार मुलाकात होती है।

दिल्ली 2009: दिल्ली मेट्रो प्रोजेक्ट के दौरान, जब मैं DYWIDAG कंपनी में कार्यरत था, तब मेरी दोस्ती जर्मनी से आए एक सहकर्मी से हुई। काम के द...