My Blog List

Monday, 14 December 2015

खुदा मेरा है और है सही तरीका इबादत का मेरा

लज्जते शौक अगर हो तो एक एहसास पैदा कर
तहे  जिगर में कोई नयी बात पैदा कर

नादानी, बेरुखापन और जाहिलियत की क्या बात करूँ
समझना है तो लहू में एक अलग से जान पैदा कर

झगरते हैं मुस्लमान भी एक बड़ी अजीब सी बात पे
छोर झगका फिरको का अपने अंदर ईमान  पैदा कर

खुदा मेरा है और है सही तरीका इबादत का मेरा
कुछ करम कर और इस्पे कोई नयी बात न पैदा कर 

डूबते कौम को बचाने की बात करने से पहले
अपने आपमें  एक अलग सी  पहचान पैदा कर ।

No comments:

Post a Comment

ज़िंदगी में हर इंसान से दो बार मुलाकात होती है।

दिल्ली 2009: दिल्ली मेट्रो प्रोजेक्ट के दौरान, जब मैं DYWIDAG कंपनी में कार्यरत था, तब मेरी दोस्ती जर्मनी से आए एक सहकर्मी से हुई। काम के द...